"वो गौरवशाली देश लौटा दो '' .
मै देश प्रेम की बात करूँगी , तुम विस्मृत संस्कृति लौटा दो
मै वीर भूमि की बात करूँगी ,तुम वो पराक्रमी जन लौटा दो .
अधर्म ,द्वेष,अनैतिकता के अनुचर, हुए यहाँ निवासी हैँ .
मै नत्मस्तक हूँ तो बस अपनी धरती के उस शूरवीर पर
जिसके हाथों मे सुरक्षा ,और देश की थाती है .
स्वार्थ रहित ,उत्सर्ग जिनका पूरी दुनिया गाती है
तुम उन वीरों की वो, शहीद -स्थली लौटा दो .
मै देश -गर्व की बात करूँगी, तुम वो खोया गौरव लौटा दो .
जहाँ स्त्री -मान रक्षार्थ खड़ा हो ,पौरूष बल तल्वार लिए
मै उस पुरूषत्व को तिलक करूँगी ,तुम जन -मन मे वो प्रबल
नैतिक स्वीकृति लौटा दो .
मै देश प्रेम की बात करूँगी तुम विस्मृत संस्कृति लौटा दो
-अंशु चौहान
-अंशु चौहान
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