डरना नहीं बस सतर्कता,साहस ज़रूरी.
जब से कोरोना शुरू हुआ डर -डर के जी रही थी. हर वक्त मानसिक तनाव,खौफ,घबराहट ....
किसी तरह तनाव में first लॉक डाउन निकाला ही था कि फिर से वैसे ही हालात बल्कि उससे कहीं और ज़्यादा ख़राब पैदा हो गए .मगर अब अति हो गई थी....दिमाग नकारात्मक चीजें सोच -सोच कर थक चुका था.फालतू चिंताएं कर- कर मैं दुखी हो गई थी.मैने दिमाग को आदेश दिया कि बस अब और नहीं.....
मरना तो एक बार ही है ना, और वो भी निश्चित है कि कब और कैसे.मौत ज़िन्दगी का अटल सत्य है, उसे कोई भी टाल नहीं सकता.फिर रोज- रोज क्यों मरना, डर - डर के .
जो अपने हाथ में नहीं उसे ईश्वर पर छोड़ कर मुक्त हो जाएं .मस्त हो जाएं .होनी हमारे हाथ में नहीं है लेकिन विश्वास और हौसला हमारे हाथ में है.हम किसी को नहीं बदल सकते,बस खुद को बदल सकते हैँ.समय हमारे वश में नहीं है लेकिन उसके प्रभाव में स्वं को स्थिर और सबल बनाये रखना हमारे हाथ में है.इसलिए विचलित मत होइए.समय कभी एकसा नहीं रहता .ये बुरे दिन भी निकल जाएंगे.डरना नहीं बस सतर्कता और साहस ज़रूरी है.ईश्वर ने जितनी ज़िन्दगी दी है इसे भरपूर जिएँ , सार्थक कर जिएँ .
😊जय श्री राधे कृष्णा 🙏

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