उसके हाथों में हम








सांसें मेरी हिसाब वो रखता है

बातें मेरी क़िताब वो रखता है

बख़्शी है ज़िंदगी की सौग़ात उसने सबको

छीन लेने का हक़  लेकिन खुद रखता है

बनाकर जमीं पर खिलौना सभी को

तमाशबीन सा मिज़ाज़ वो रखता है

न मौत हाथ में है न ज़िंदगी किसी के

समय पर पहरेदारी वो रखता है

कैसे कह दूँ इस ज़िंदगी पर हक़ मेरा है

 अधिकार सारे जब वो रखता है।

न मायूस होने देता है न ख़ुश कभी ज़्यादा

नाप -तौल  कर  हिदायतें वो रखता है।

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