बारिश









काले -काले बादल नभ में ,घनघोर घटाएँ छाई हैं

सावन की मतवाली बारिश हमें नहलाने आई है।

मन है उमंगित ,धीर -अधीर सा, 

 गर्मी की सब अलसाई दूर भगाने को

ठंडी फुहारों की आँगन में, भीनी ख़ुशबू आई है।

बच्चों की एक टोली ने, 'नाव' सुघढ़ बनाई है

चंचल बाल -मनों  में अब तो, भारी मस्ती छाई है।

मोर ,पपीहा ,कोयल, मेंढ़क, सब जैसे बौराए हैं

तपती धरा को बदरी ये काली, नीर थमाने आई हैं।









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