'ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर'

ओ  सी डी (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर )

यदि आप अपनी कुछ आदतों को तारीफ़ के क़ाबिल समझते हैं तो अपनी ये ग़लत फ़हमी दूर कर लीजिए।

क्योंकि कुछ आदतें तारीफ़ की नहीं वरन उपचार  की ज़रूरत रखती हैं।जी हाँ !आपकी कुछ आदतें जिन पर-

  आप को गर्व  है वो डॉक्टर की  नज़र में किसी बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं।

 हमारी कुछ आदतें ऐसी होती हैं जिन्हें हम सहज मानकर चलते हैं। लेकिन जब ये आदतें हमारे निज़ी -जीवन

को असहज बनाकर समस्याएँ पैदा करने लगती   हैं तो इनको क़ाबू में करना ज़रूरी हो जाता है

अन्यथा ये बीमारी का रूप ले लेती हैं।ऐसी ही आदतों का का नाम है -'ओ सी डी' बीमारी।

एक ही काम को बार -बार करना ,बार -बार देखना कि काम सही से हुआ है या नहीं ,

बार-बार साबुन से हाथ धोना,कोई चीज़ सही जगह न होने पर आक्रामक हो जाना, फ़ालतू  चीज़ों को घर में-जमा किए रखना जैसे -पुराने कपड़े आदि,कई बार नहाना या घर की दिन में कई बार सफाई करते रहना आदि ओ सी डी के लक्षण हैं।

ओ सी डी के कारण -मस्तिष्क में ख़ास क़िस्म के एक रसायन(सेरेटोनिन ) के लेवल में कमी से ये बीमारी हो सकती है। ये जेनेटिक बीमारी है।
अगर कोई व्यक्ति साफ़ सफ़ाई में बहुत ज़्यादा  ध्यान देता है या हर काम को परफेक्शन से करता है और ऊँचे सिद्धांतों वाला है तो उसे ये बीमारी होने के ज़्यादा चांसेज़ हैं।
यह बीमारी 10 से 12 साल या 20 से 25 साल तक कभी भी शुरू हो सकती है।
उपचार -यदि  आदतों को नियंत्रित किया जा सकता है तो कोई चिंता की बात नहीं है। लेकिन अगर ये आदतें नियंत्रण से बाहर हैं और सामान्य जिंदगी को प्रभावित कर रही हैं तो मनोवैज्ञानिक उपचार व दवाईयों की जरुरत पड़ सकती है।
चेतावनी -क्या पता  हमारी कौन सी  आदत  चिकित्सकीय भाषा में बीमारी की श्रेणी में रख दी जाए...
 ये कोई अनुमान नहीं लगा सकता।इसलिए सजग रहें स्वस्थ रहें। आदतों पर नियंत्रण रखें।
😊😜🙏




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