हम  अपनी  भारतीय  संस्कृति पर बड़ा गर्व करते हैं और गर्व होना भी चाहिए क्योंकी भारतीय संस्कृति सदा से ही सम्माननीय रही है। इस देश ने हमेशा धार्मिक संस्कारों और,सामाजिक मर्यादाओं को महत्त्व दिया है । परन्तु आज हमारी इस संस्कृति ने अपना मूल स्वरुप खो दिया है क्योंकि इस पर पाश्चातीय  सभ्यता का जबरदस्त  असर हो रहा  है । आज भारतीय संस्कृति  से ''मर्यादा''शब्द बाहर  हो चुका है । हम पश्चिमी  देशों की नक़ल करते-करते इतने विवेक हीन हो गए हैं कि सही ग़लत का भेद भी  हमें अब समझ नहीं आता है ।इस विवेकहीनता का स्पष्टीकरण  इस  बात से  स्वतः हो जाता है कि सरकार यहाँ ''संबंधों की उम्र निर्धारित कर रही है । गौर करने लायक पहलू ये नहीं है -कि क्या उम्र निर्धारित कर रही है बल्कि ये है कि भारत जैसे पवित्र देश में इस तरह की गंदगी के बारे में विचार क्यों किया जा रहा है । इस तरह के  कदम से सिर्फ  नैतिकता की  हत्या होगी । समाज में गंदगी  फैलेगी और आने वाले समय में देश की जो तस्वीर सामने आयेगी उस पर हम आंसू बहाने के अतिरिक्त  कुछ नहीं कर पाएंगे ।
      

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