एक दीप अपनी चाहत का






एक  दीप अपनी  चाहत  का इस सूनेपन  में  जला  दो
मेरी खोई  हुई मुस्कान मेरे होठों  पे  सजा दो ।
बस तुम्हारी ही दिलकश नज़र ने इस दिल को चुराया है
प्रियतम :अपनी सांसों की खुशबू  से मेरा जीवन महका दो ।
टूटी हुई उम्मीदें ,रूठे हुए अरमां है
साथ देकर अपना मुझे  जीना सिखा दो ।
हर पल घुटती  सिसकती  हूँ  मै
खो  न दूं होश अपने तड़प कर इस तरहा
आकर अब ये बेखुदी मिटा दो ।






-तस्वीर साभार गूगल








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