'रक्षा बंधन,' भाई - बहन के पवित्र रिश्ते व प्यार को दर्शाने वाला एक प्रसिद्ध त्यौहार है । भगवान श्री कृष्ण के काल से ही इस  त्यौहार की परम्परा शुरू हो गई थी । पौराणिक कथाओं के अनुसार  द्रौपदी ने  भगवान श्री कृष्ण के राखी बाँधी थी । भगवान ने इस बंधन को निभाने का व  उनकी रक्षा का वचन लिया था । यम (मृत्यु  के देवता ) को भी उनकी बहन यमुना  ने राखी बांधी थी । माँ संतोषी ने रिद्धि -सिद्धि को, जो की गणेश जी के पुत्र
 थे, को राखी बाँधी  थी । इस  प्रकार  कई पौराणिक उदाहरण है जो रक्षा -बंधन त्यौहार की महत्ता प्रमाणित करते हैं । पौराणिक काल में भाई व बहन के ये जो भी उदहारण हैं उनमे इस रिश्ते की महत्ता व उत्कृष्टता खोजने की आवश्यकता ही नहीं होती थी स्वतः प्रमाणित होती थी परंतु आज खोने पर भी इसमें उस तरह की आत्मीयता मै औचित्यता का अभाव दिखता है क्योंकि आज के संदर्भ में ये त्यौहार भाई -बहन के बीच  सिर्फ़ रुपयों व उपहारों का आदान-प्रदान व आर्थिक सुदृढ़ता का प्रदर्शन करना मात्र बन चुका है । आज भाई -
बहन के रिश्ते में भी स्वार्थ  व ईर्ष्या की भावना पनप चुकी है अतः ये त्यौहार भी एक औपचारिकता सा बन गया है । आज बहन भाई के लिए दुआओं से ज़ियादा  ,उससे  धन व उपहार प्राप्ति की इच्छा रखती है।    भाई भी इसलिए इसे औपचारिकता  समझ कर ही निभाते हैं । आपस में भावनात्मक लगाव कम हुआ है और यांत्रिकता का प्रभाव बढ़ा है । इस त्यौहार व इस रिश्ते की मज़बूती के लिए हमे अपना दृष्टिकोण भावनात्मक बनाना होगा ,धन से जियादा रिश्तों को तबज़्ज़ो देनी होगी । स्वार्थ की भावना का त्याग करना होगा ।

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