नियम  और कानून इंसान की सहूलियत के लिए बनाए गए हैं, लेकिन यही नियम व कानून अगर इंसान की जिंदगी व सुख चैन के दुश्मन बन जाए तो मैं कहती हूँ ऐसे नियम व बंधनो को तोड़ देना चाहिए बशर्ते किसी नैतिक मर्यादा का उल्लंघन न हो रहा हो । ऐसे नियम व कानून जो जिंदगी को बोझिल बना दें ,जो खोखले हों ,
जो अतार्किक हों उन्हें तोड़ने में ही भलाई है । हर औचित्यहीन नियम व कानून को परिवर्तित किया जाना चाहिए लेकिन अहिंसात्मक व विवेकपूर्ण तरीके से । नियम ,कानून व्यक्ति के हितार्थ बनाए गए हैं अत : इनकी आड़ में किसी का शोषण नहीं होना चाहिए न ही इनके  नाम पर किसी को शहीद  किया जाना चाहिए । हाल ही में एमिटी यूनिवर्सिटी के एक छात्र की कम उपस्थिति की वजह से उसे परीक्षा से बंचित रखना ये दर्शाता है की नियम इंसान की जिंदगी से ज्यादा अहम हैं बनते जा रहे हैं । क्या मंदिर में पूजा के लिए खड़े  किसी बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति के लिए, पंक्ति में आगे खड़े लोगों को पीछे कर देना एक अपराध होगा ?मेरी दृष्टि में तो नहीं । इसलिए अगर कोई  नियम किसी मासूम ,निर्दोष व्यक्ति की जिंदगी तबाह करने जा रहा हो तो उसे तोड़ देना चाहिए । कई समाज में स्त्रियों के साथ नियम व परम्पराओं के नाम पर बड़ा ही अमानवीय व्यवहार होता है ,ऐसी परम्पराओं व नियमों को तोडा जाना चाहिए । 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो

भीतर की सुन्दर दुनिया में रहें'