'वो मजदूर है'




मेहनत कर जो ख़ुश रहे, वो मजदूर है

चटनी-रोटी से जो तृप्त रहे,वो मजदूर है

थकान में जिसको राहत, वो  मजदूर है

'धरा' जिसका बिछौना,वो  मजदूर है

कर्म से ही जिसको प्यार, वो मजदूर है

दूर जिससे आलस्य, वो मजदूर है

न होड़ अमीरी से जिसे,वो मजदूर है

मज़बूत जिसका हौसला ,वो मजदूर है

धूप और ताप से जो बेअसर, वो मजदूर है

है तृष्णाओं से जो दूर ,वो मज़दूर है।

तेरे  हर विश्राम में जो, वो मज़दूर है

-अंशु चौहान







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