शिक्षक दिवस
सभी आदरणीय शिक्षकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई!
आज शिक्षक दिवस के अवसर पर मस्तिष्क में एक मंथन सा चल रहा है। दो तरह के शिक्षक मुझे आज याद आ रहे हैं एक वो जो अपने हर शिष्य के उज्ज्वल भविष्य की कामना रखते हुए उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं । जो अपने कमज़ोर छात्र की भी अन्य क्षमताओं को पहचान कर उसे आगे लाने के लिए प्रयासरत रहते हैं न कि उसे डाट -पीट कर,उसकी उपेक्षा कर उसका मनोबल कमज़ोर करते हैं. और जो अयोग्य छात्र को भी योग्य बनाने की ताकत रखते हैं ।
दूसरे वो जिनका व्यक्तित्व अख़बारों के माध्यम से सामने आता है कि अमुक अध्यापक ने प्रश्न का उत्तर न दिए जाने पर अपने छात्र को इतनी बुरी तरह पीटा कि छात्र बेहोश ही हो गया। ऐसे ही अन्य कई जो इस तरह की छोटी -छोटी बातों पर असहनीय दंड प्रदान करते हैं। अब शिक्षक तो दोनों ही हैं?लेकिन सच्चे अर्थों में शिक्षक दिवस का औचित्य किनके सन्दर्भ में है ये सर्वविदित है ही।
एक योग्य शिक्षक में इतनी ताक़त होती है कि वो अपने कमज़ोर छात्र में भी क्षमताएँ पैदा कर सकता है। कई
ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में पहले गुरु शिष्य के सम्बन्ध ऐसे होते थे कि विद्यालय विद्या का केंद्र न लगकर यातना केंद्र लगता था । वहाँ बच्चों की पिटाई के लिए बेंत का एक छोटा डंडा रखा जाया करता था और पहाड़ा (table )या कोई सवाल न आने पर दोनों हाथों पर 4 -4 या उससे अधिक सूत दिये जाते थे। कल्पना कीजिए ऐसे स्कूलों में शिक्षक दिवस की महत्ता का?
आज शिक्षा में moral values का कोई ख़ास स्थान नहीं है। सब कैरियर ऑरिएंटेड हो चुके हैं इसलिए शिष्य बस सिर्फ़ डॉक्टर ,इंजीनियर आदि बनकर अच्छे से अच्छी सैलरी पानी की होड़ में व्यस्त हैं और शिक्षक उन्हें इस जंग में जिताने की कोशिश में। लेकिन सभी ये भूल रहे हैं कि गुरु होने के नाते नैतिक तौर पर मज़बूत बनाना पहली आवश्यकता है क्योंकि अपेक्षित संस्कारों और नैतिक ज्ञान के बिना किसी भी अच्छी परम्परा (गुरु -शिष्य ) का निर्वहन संभव नहीं है। लेकिन मै उन सभी शिक्षकों के सामने नतमस्तक हूँ जिन्होंने इस परम्परा को बनाए रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जो सच्चे अर्थों में गुरु हैं और शिक्षक दिवस के इस शुभ अवसर पर सम्मान के अधिकारी हैं। उन सभी शिक्षकों को मेरा कोटि -कोटि प्रणाम।

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