प्रणय के उदगार
प्रणय के उदगार तुम्हारे
मेरी स्मृतियों में बसने दो ।
कमसिन सी इस देह को अपने
आलिंगन में बंधने दो ।
प्रेम -पुष्प की कोमल पंखुड़ियाँ
चारों ओर बिखरने दो ,
मै स्वप्न -महल की राजकुमारी
तनिक मुझे संवरने दो ।
स्पर्श-उमंगित मन की आतुरता
विरह -नीर में मिलने दो ,
अश्रु -प्लावन होने से पहले
रुको मुझे सँभलने दो ।
प्रियवर !अपनी चितवन की
जंजीर में मुझको कसने दो ,
किंचित ,काश के शब्द -जाल से
मुझे आप निकलने दो ।
आज समग्र समर्पण अपनी
मुख -मुद्राओं पर करने दो ,
प्रणय के उदगार तुम्हारे
मेरी स्मृतियों में बसने दो ।
रचनाकार -अंशु चौहान
तस्वीर साभार -
गूगल
मेरी स्मृतियों में बसने दो ।कमसिन सी इस देह को अपने
आलिंगन में बंधने दो ।
प्रेम -पुष्प की कोमल पंखुड़ियाँ
चारों ओर बिखरने दो ,
मै स्वप्न -महल की राजकुमारी
तनिक मुझे संवरने दो ।
स्पर्श-उमंगित मन की आतुरता
विरह -नीर में मिलने दो ,
अश्रु -प्लावन होने से पहले
रुको मुझे सँभलने दो ।
प्रियवर !अपनी चितवन की
जंजीर में मुझको कसने दो ,
किंचित ,काश के शब्द -जाल से
मुझे आप निकलने दो ।
आज समग्र समर्पण अपनी
मुख -मुद्राओं पर करने दो ,
प्रणय के उदगार तुम्हारे
मेरी स्मृतियों में बसने दो ।
रचनाकार -अंशु चौहान
तस्वीर साभार -
गूगल
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