जब अनैतिकता की श्रेणी में आने वाली बातों पर मेरी नाराजगी लोगों को अनुचित लगती है ,तब मुझे अहसास होता है कि या तो आधुनिकता की दौड़ में मै बहुत  पीछे रह गई हूँ या फिर वो लोग संस्कारहीनता की दौड़ में बहुत आगे निकल गए हैं । 

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