गज़ल

ख़यालों से दिल को बहलाती रही हूँ मै
उसने सुना न सुना मुझको ,आवाज उसको लगाती रही हूँ मै
1  .एक दर्द सा रह-रहकर उठता है ज़िगर में ,फिर भी उम्मीदों के टूटने की फ़िकर में
ख़ुद को ख़ुशी से समझाती रही हूँ मै
ख़यालों से ................................................................................................
2  मायूसी का साया फैला है इस कदर से ,जोशे ज़िन्दगी भी मिट गया है जहन से
बेचैनियों से दामन सजाती रही हूँ मै
ख़यालों से ..................................................................................................
3 ये मुक़द्दर है जो पल-पल जीता है मुझसे ,कई बार मुझको रुलाया है इसने
ख़ामोशी से ख़ुदा को बुलाती रही हूँ मै
ख़यालों से .....................................................................................

तस्वीर साभार -गूगल

रचनाकार -अंशु चौहान 

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