उसूलों की ख़ातिर




इस बेईमान दुनिया में कुछ ईमान तो रख.

दे मगर, कुछ सामान अपने पास भी रख.

छोड़ दे परवाह बेहिसाब  बंदिशों की

दिल में सच्चाई का एक तूफ़ान तो रख.

लोगों की नज़रों में उठने की परवाह फ़िज़ूल है

ख़ुदा की निगाहों में स्वं को भला इंसान तो रख.

रोकेंगी जमाने की गुस्ताख़ तोहमतें लेकिन

 उसूलों के लिए ,मिटने की  एक आग तो रख।

तू कल भी यहीं था ,आज भी यहीं है

आगे बढ़ने की कुछ  शुरुआत तो रख।

 मंज़िल क़रीब ही  है अब तेरी

पाने  के दिल में अरमान तो रख।






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