ज़िद तो बस ज़िद है











ज़िद तो बस ज़िद है कभी वाज़िब ,तो कभी वाज़िब नहीं होती

कुछ जायज़ ,नाजायज़ तमन्नाओं का असर रखती है

कभी उठा लेती है आसमान सर पर छोटी सी चीज़ पाने को

तो कभी मचा देती है तूफ़ान नई क्रांति लाने को

ये अपने मेहरवान पर जूनून सवार रखती है.

ज़िद तो बस ज़िद है कभी वाज़िब, तो कभी वाज़िब नहीं होती।

समन्दर ,नदी ,पहाड़ का भी रुख मोड़ दे जो

शोर , आँसुओं की जुबां जिसके पास हो

जमीं से आसमां तक फ़ैसले बदलने की ताक़त रखती है

ज़िद तो बस ज़िद है कभी वाज़िब तो कभी वाज़िब नहीं होती।

खिलौनों की दुकान में बच्चों की मनमानी तक

गहनों -आभूषणों में  नारी की दीवानगी तक

ऊँची क़ीमतों में भी ,क़ीमत अदा कराने  की मज़ाल रखती है

ज़िद तो बस ज़िद है कभी वाज़िब तो कभी वाज़िब नहीं होती।







टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो

भीतर की सुन्दर दुनिया में रहें'