दिल्ली के दरियागंज इलाके में रविवार की रात बाइक से कार छू जाने की मामूली सी घटना ने जिस तरह भयावह रूप धारण, किया इससे स्पष्ट पता लगाया जा सकता है कि आज कल लोगों में सहनशीलता व मानवीयता की कितनी कमी हो चुकी है । एक भौतिक चीज़ क्या किसी इंसान के लिए इतनी महत्वपूर्ण हो सकती है कि वह उसके लिए किसी व्यक्ति की हत्या कर दे । कोई मानव इतना क्रूर कैसे हो सकता है कि गाड़ी में जरा सी खरोंच आने पर बदले की भावना में वह उस परिवार की समस्त ख़ुशियाँ ही छीनने पर आमादा हो जाये । इतना संकुचित दृष्टिकोण लेकर इंसानियत का अस्तित्व बरक़रार नहीं रखा जा सकता । कोई भी भौतिक चीज़ किसी इंसान के जीवन से अधिक मूल्यवान नहीं हो सकती । अपनी ख़ुशी के लिए किसी दूसरे की ख़ुशी मिटाना इंसानियत पर प्रश्नचिन्ह लगा देता है ।
मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो
मृत्यु के भय से अगर सही को सही और गलत को गलत ना कह सको,तो सन्देह करो अपने मनुष्य होने पर . शक्तिशाली हो कर अगर किसी निर्बल की शक्ति न बन सको,तो संदेह करो अपने शक्तिशाली होने पर. संपन्न हो कर अगर मदद ना कर सको किसी निर्धन की,तो सन्देह करो अपनी सम्पन्नता पर . पुरुष हो कर अगर किसी नारी के सम्मान की रक्षा न कर सको,तो संदेह करो अपने पौरुष पर। धार्मिक हो कर भी अगर धर्म की रक्षा न कर सको, तो धिक्कार तुम्हारे धार्मिक होने पर. मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो इस धरा पर, सिर्फ देह मनुष्य की होना ही मनुष्यता नहीं, समझो इस ध्येय को तो इंसान हो तुम ना समझो तो चारा चर रहो कही। -
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