'मै हूँ साथ तेरे '


तुम मुझे देखकर मुस्कुराते क्यों हो
 वो दर्द इस दिल में छुपाते क्यों हो
हो जाऐगी 'सहर 'भी  इस' गम ए शाम' की
इन हालातों से तुम घबराते क्यों हो
कभी जो अँधेरों  में लगे राह मुश्किल
हूँ बनके उजाला  तेरे साथ हरदम
तुम साये में मेरे लड़खड़ाते क्यों हो ।

-अंशु चौहान 

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