एक निश्छ ल मुस्कुराहट में कितनी ताक़त होती है ये हम सभी जानते हैं फिर भी इसका उपयोग इतना कम क्यों किया जाता है । एक पवित्र , छल रहित मुस्कान सभी के लिए एक स्वास्थ्यवर्धक टॉनिक की तरह होती है जो देने और ग्रहण करने वाले दोनों के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य को ऊर्जा प्रदान करती है । दिलों की कड़वाहट मिटा देती है ,हर द्वेष मिटा देती है, एक निष्छल ,मुस्कान । इसके विपरीत एक कुटिल ,छल युक्त मुस्कान किसी के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होती क्योंकि इसके पीछे दुर्भावना और द्वेष छुपा होता है । आइए इस नववर्ष हम ये कोशिश करें कि सभी को अपनी निश्छल मुस्कुराहट दे सकें ताकि आपसी मतभेद मिट सके और वैचारिक उदारता का वातावरण स्थापित हो सके ।
मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो
मृत्यु के भय से अगर सही को सही और गलत को गलत ना कह सको,तो सन्देह करो अपने मनुष्य होने पर . शक्तिशाली हो कर अगर किसी निर्बल की शक्ति न बन सको,तो संदेह करो अपने शक्तिशाली होने पर. संपन्न हो कर अगर मदद ना कर सको किसी निर्धन की,तो सन्देह करो अपनी सम्पन्नता पर . पुरुष हो कर अगर किसी नारी के सम्मान की रक्षा न कर सको,तो संदेह करो अपने पौरुष पर। धार्मिक हो कर भी अगर धर्म की रक्षा न कर सको, तो धिक्कार तुम्हारे धार्मिक होने पर. मनुष्य हो तो मनुष्य बन रहो इस धरा पर, सिर्फ देह मनुष्य की होना ही मनुष्यता नहीं, समझो इस ध्येय को तो इंसान हो तुम ना समझो तो चारा चर रहो कही। -
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
allowed