दरिया  को समंदर कर लें
सपनों को अम्बर कर लें
अब एक हो अपनी मंजिल
कुछ हंसी वो मंज़र कर लें                                      
बीते -रीते पल की हर फ़िजूल सी चिंता
 आशाओं से खंजर कर लें 
उम्मीद बंधीं जो दिल में
जीवन का संबल कर लें।





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