इंसान में अगर संतोष का भाव आ जाए तो कोई भी मोटिवेशनल स्पीच उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित नहीं कर सकती 

क्योंकि प्रतिस्पर्धा ,असंतोष और तृष्णा की भावना के बिना इंसान में आगे बढ़ने का साहस नहीं आ सकता। इसलिए 

भौतिक जीवन में सफलता के लिए तो  असन्तोष या  तृष्णा ज़रूरी है आगे से आगे उन्नति के लिए लेकिन आध्यात्मिक उन्नति के लिए इन्ही वृत्ति पर नियंत्रण ज़रूरी है। 

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