वैलेंटाइन्स डे 'दर्शन'
प्यार में रिश्तों की मर्यादा का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए । सगी रिश्तेदारियों में किसी से प्रेम -संबंध रखना एक पाश्विक वृत्ति है ,एक मानसिक कुंठा या मानसिक विकार है ।
जिस प्रेम को छुपाने की आवश्यकता पड़े वह प्रेम नहीं है वरन एक मानसिक विकृति है । उसे ख़त्म कर देना ही उचित है। उत्कृष्ट व मर्यादित प्यार को कभी भी छुपाने की ज़रुरत नहीं होती । जिस प्यार में नैतिकता का उल्लंघन न हो वह प्यार इंसान को मानसिक रूप से दृढ ही बनाता है । उसकी उन्नति ही करता है । जिस प्यार को किसी को भी हानि पंहुचा कर प्राप्त किया जाए वो प्यार नहीं है वह तो अहम् है। प्यार तो समर्पण है, त्याग है । सर्वहित है। यदि मन में बदले की भावना है तो प्यार नहीं हो सकता क्योंकि प्यार में किसी को चोट पहुँचाने की भावना नहीं होनी चाहिए। अनैतिक तरीके से प्यार को पाने की इच्छा रखने वाले और उसके लिए अपनी सीमाओं का उल्लंघन करने वाले का पतन निश्चित ही होता है ।

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