गिरिजा देवी मंदिर (उत्तराखंड)
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| गिरिजा देवी मंदिर |
ये है गिरिजा देवी मंदिर। उत्तराखंड राज्य के बहुत ही सुन्दर ,शांतिमय और मनोहारी वातावरण युक्त स्थान में ये मंदिर स्थापित है। ये मंदिर कोशी नदी के तट पर स्थित है। रामनगर से 10 -15 किo मीo दूर ढिकाला मार्ग पर इस मंदिर की प्राकृतिक छटा अत्यंत मनमोहक है। जी चाहता है कि यहीँ बस जाओ। माँ गिरिजा देवी के इस मंदिर में लोगों की असीम आस्था है। माँ गिरिजा (गर्जिया )देवी गिरिराज हिमालय की पुत्री हैं और शिव भगवान की पत्नीहैं।
कहा जाता है कि घने जंगलों से घिरा होने के कारण इस क्षेत्र में अक़्सर शेर या अन्य वन प्राणियों की दहाड़ ही सुनाई देती थी। लेकिन मंदिर स्थापना के बाद अब लोग बड़ी श्रद्धा से और निर्भीक भाव से यहाँ दर्शन को आते हैं।
एक बार कोशी नदी की बाढ़ में ऊपरी क्षेत्र से एक टीला और उसके साथ माँ की एक मूर्ति बह कर आ रही थी.टीले के साथ माँ की मूर्ति के करीब आते ही स्थानीय वन कर्मियों ने पाया कि उस मूर्ति में एक शक्ति एक सकारात्मक ऊर्जा थी। अत: उन्होंने यहाँ एक मंदिर की स्थापना करवा दी और मूर्ति को स्थापित कर दिया। इस प्रकार 1940 में इस मंदिर का विधिवत निर्माण हुआ।
लोगों का मानना है कि माँ सभी भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं। यहाँ नवरात्रि ,दशहरा ,शिवरात्रि आदि त्यौहारों पर बड़ा मेला लगता है। यहाँ लोग अपनी मोकामनाएँ लेकर आते है और माँ को नारियल ,लाल वस्त्र ,सिंदूर धूप आदि समर्पित करते हैं। कोशी नदी का बहता हुआ पवित्र जल और चारों तरफ़ पहाड़ियाँ ,हरयाली मन को आनंदित कर देते हैं। एक और अद्भुत चमत्कारी तथ्य ये है कि कोशी नदी में कई बार बाढ़ आने पर भी माँ की मूर्ति वहीँ सुरक्षित स्थिति में बानी रहती है। श्रद्धा और पवित्र मन से दर्शन को आने वाले हर भक्त की यहाँ पुकार सुनी जाती है लेकिन माँ के दर्शन को सम्पूर्ण तभी माना जाता है जब माँ के साथ - साथ भैरव बाबा की भी पूजा की जाती है। इसलिए जब भी उत्तराखंड भ्रमण के लिए जाएं तो इस पवित्र स्थल को अवश्य देखें। प्रसिद्ध ';जिमकोर्वेट नेशनल पार्क' भी इसी सीमा में आता है।

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