मै रिश्ता निभाती हूँ
तुम इनकी मर्यादा निभाते हो
मैंने शरीर को अहम् समझा तुम आत्मा तक जाते हो
मै एक  कदम चलती हूँ
तुम दो कदम बढ़ जाते हो
सचमुच श्रेष्ठता में तुम मुझसे  बहुत आगे हो
मै तुमसे आज अपनी हार मानती हूँ
मगर ये हार भी मेरी ही जीत हैक्योंकि

तुझ विजेता  को मैंने  पाया  है
मोहब्बत की  तुमने बखूबी इवादत की है
मुझसे न बन सकी तुमने इनायत की है
शिकायत तो खुद से ही है मुझे
तुम क्यों रूठ जाते हो

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