मेरी हर हार पर अहम् उनका पलता रहा , मैंने यही सोचकर अब जीतना छोड़ दिया
आश्रित के लिए मेरा भी आखिर,कुछ तो फ़र्ज बनता है ।
आश्रित के लिए मेरा भी आखिर,कुछ तो फ़र्ज बनता है ।
मेरे इस इंद्रधुनषी रंगों वाले ब्लॉग में किसी 'विषय' विशेष को लेकर रचनाएँ नहीं लिखी गई हैं ,बल्कि मनुष्य के मन में उठने वाले हर भावों और समाज से जुड़ी हर घटनाओं ,हर समस्याओं ,उससे जुड़े खट्टे -मीठे अनुभवों को लेकर ही समस्त रचनायें की गई हैं.जीवन के हर रंग,हर पहलू को अनुभव करने के लिए मेरे ब्लॉग से जुड़े रहें |
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