असंयम, असहिष्णुत्ता ,व्यभिचार ,बलात्कार
बस यही है पहचान अब भारतीय संस्कृति की
क्षीण मानवीय मूल्य ,हिंसा ,लोभ ,अनाचार
बस यही है पहचान अब भारतीय संस्कृति की
न अतिथि सम्मान ,न सदगुणों का मान
पर निंदा ,पर उपहास
बस यही है पहचान अब भारतीय संस्कृति की
मृत प्राय : हो रही है नैतिकता महान, वो खो चुकी संस्कृति
जिस पर था कभी गुमान
दूसरों को नसीहत ,नहीं स्व दुर्गुणों का भान
बस यही है पहचान अब भारतीय संस्कृति की
खून के रिश्तों में भी कालिख मलिनता की
दरिंदगी ,दुर्ब्रित्ति ,घ्रिनास्पद  व्यवहार
बस यही है पहचान अब भारतीय संस्कृति की । 

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