मुझे कुछ कहना है

दीवानगी की हद तक चाहती हूँ तुम्हें ,
मै ख़ुदा को पूजती हूँ और दुआओं में 
उनसे मांगती हूँ तुम्हें । 
ख्वावों में आज तक देखती थी जिसे, 
आज अपने  करीब हरदम पाती हूँ उसे । 
ए जाने जिगर उम्मीदे वफ़ा 
जख्मे बेवफ़ाई ना देना मुझे ,
मोहब्बत तुम्हारे लिए है मेरी 
लुटाती रहूंगी सदा 
मंजिले आशिक़ी बना के चलना मुझे । 
बहुत अँधेरा है जीवन में तुम्हारे बिना 
दीप!रौशन अपने प्यार से बनाना इसे । 




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