'कोई दर्द '
बाहर से ख़ुश दिखता हो पर, भीतर एकदम रीता है ।
कितने रिश्ते दिल से जाने ,कितने मजबूरी में ढोता है
कोई दर्द तो साथ है उसके ,चुपके -चुपके रोता है ।
प्यार बनाया मज़बूरी को ,या मज़बूरी से प्यार किया
हालातों की मार थी ऐसी ,ज़ज़्बातों से हार गया ।
दिल में ज़ख्म छुपाकर जाने, किस धागे से सीता है
राज नहीं खुलता कोई दिल का ,पत्थर बन कर जीता है । ।
-अंशु चौहान
-अंशु चौहान

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