'ग़लत सोच'
कभी भी किसी इंसान के बारें में अपनी धारणाएं मत बनाइए। जब तक की आप उसे ठीक से जान नहीं लेते हैं ,अपना मत न रखें ।अमुक व्यक्ति अच्छा है ,बुरा है वो ऐसा करता है ,वैसा करता है आदि क्योंकि कई बार हम किसी इंसान को इतना ग़लत समझ बैठते हैं कि हमें अपनी सोच पर ख़ुद पश्चाताप होता है । अतः इस पछतावे से बचने के लिए जरुरी है कि हम ये गलती ही न करें ।
किसी भी व्यक्ति को समझने के लिए हमे उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व का,उसकी मानसिक स्थिति का सही आँकलन करना जरुरी होता है लेकिन हम क्या करते हैं कि उसकी किसी एक बात से या उसके बारे में सुनी गई किसी बात से ही उसका सम्पूर्ण विश्लेषण करने की कोशिश करते हैं।जो एकदम ग़लत है।हम किसी के बारे में किसी के द्वारा कही गई बातों से कैसे सत्य का पता लगा सकते हैं, जबकि ये संभव है कि वह व्यक्ति उस व्यक्ति के प्रति निष्पक्ष न हो।वह व्यक्ति उसके प्रति दुर्भावना से ग्रसित भी हो सकता है या उसके प्रति पक्षपाती भी हो सकता है ।
हम किसी के बारे में अच्छी या बुरी राय अक्सर किसी तीसरे से सुनकर ही बनाते हैं।हर इंसान में कुछ ना कुछ बुराई व अच्छाई ज़रूर होती है।हमारा ध्यान यदि बुराई पर ही जाता है तो समझ लीजिए कि हमें खुद को सुधरने की ज़्यादा ज़रूरत है क्योंकि जैसी हमारी दृष्टि होती है वैसी ही चीज़ हमें दिखाई देती है । जिस तरह सही तीरंदाजी बिना एकाग्र और सही दृष्टि के नहीं हो सकती। उसी तरह मनुष्य की सही पहचान भी बिना सही सोच और निष्पक्षता के नहीं हो सकती ।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
allowed