'कंप्यूटर पर टाइपिंग और' टेनिस एल्बो' के बाद से मेरी लिखावट '
कंप्यूटर पर टाइपिंग और' टेनिस एल्बो' के बाद से मेरी लिखावट का जो हाल हुआ है बता नहीं सकती । इसके साथ ही लिखते वक़्त मुझमें धैर्य की कमी। मैं बस शुरुआती पंक्ति के अंतिम छोर तक जल्द से जल्द पहुँचना चाहती हूँ । और इतना सा इंतजार भी मुझसे नहीं होता । आज तो हद ही हो गई ।जैसे ही कुछ लिखना शुरू किया तो देखा कि मैंने 'ल 'को पेड़ की ऐसी शाखा पर लटका दिया है जो टूटने के कग़ार पर है,और वो मुझसे कह रहा है -मुझे बचा लो '। 'मैं ' का हाल ऐसा था जैसे किसी बहुत संकरी गली में फ़स गया हो और निकलना मुश्किल है । 'क' बेमतलब सीना फुलाकर, ठहाके लगाकर हँस रहा था । 'च ' मैराथन में भाग लेने को तैयार था । सारे शब्द मानो 'बौरा 'गए थे और मैं उन्हें समझने की कोशिश कर रही थी कि कुछ नहीं होगा । सब सुरक्षित हो । बस यूँही सब अपनी -अपनी जगह पर बने रहो । ये सब इस नासमझ पेन की ख़ता है जो अब मेरी उँगलियों में ठीक से नहीं टिकता वरना कंप्यूटर पर तो तुम्हारा पूरा ख़याल रखती हूँ । ☺☺

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