ग़ज़ल( दस्तक भी ना दी आने से पहले...)







दस्तक भी ना दी आने से पहले आए तुम चुपचाप सनम
पहले तो नहीं थे ऐसे सनम तुम ये कैसा दीवानापन ।
१.रातों को मेरी याद का मौसम क्या तुमको तड़पाता है ,या  चंचल सा तेरा मन वो मेरी धड़कन को सुन जाता है
फिर क्यों  ऐसा  हाल तुम्हारा ,कैसा ये परवानापन
दस्तक भी ना दी ------------------------
२ मैंने सुना है मेरी ख़ातिर तू सबको ठुकराता है, पाने को मेरे प्यार का साया तू आँसू पी जाता है
मुझसे कभी तू कहता नहीं कुछ ,ये कैसा अनजानापन
दस्तक भी ना -----------------------------
३ मेंरी दुआ है तेरी मोहब्बत मुझको और मेरी तुझको मिल जाए
हर अरमां तेरा-मेरा अब तो पूरा हो जाए ,क्योंकि तेरी चाहत बिना मुश्किल जीना है हमदम ।
दस्तक भी ----------------------------


-१९९४ (गीत )

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