'सड़क सुरक्षा सप्ताह '
'सड़क सुरक्षा सप्ताह 'ने आज फिर मेरा ध्यान सड़कों पर वाहन चलाते वक़्त लोगों द्वारा की जाने वाली लापरवाही पर केंद्रित किया । अधिकतर लोगों के वाहन की रफ़्तार बहुत तेज होती है । लोग हैलमेट'को शायद सिर की जगह कंधे पर रखना ज़्यादा पसंद करते हैं ।
सबसे ज़्यादा हद तो किशोर व युवाओं ने कर दी है । सड़क पर दोनों हाथ छोड़ कर बाइक चलाना ,बाइक से फ़ालतू स्टंट दिखाना ,तेज़ स्पीड रखना तो जैसे इनके लिए अपरिहार्य(जिसे टाला न जा सके ) कर्म है । न जाने इनके दिमाग़ में ये चीज़ें कौन डाल देता है कि किशोर या युवा होने पर ऐसा करने से लोग इम्प्रेस होते हैं । सच्चाई तो ये है कि ऐसा करके ये अपनी जिन्दगी तो ख़तरे में डालते ही हैं सभ्य लोगों की नज़रो से भी गिर जाते हैं ।
जरा सोचिए कि कौन से माँ -बाप अपनी संतान को दुर्घटना ग्रस्त स्थिति में देख कर खुश होंगे । या कौन से माँ -बाप चाहेंगे कि उनके बच्चे के द्वारा कोई दुर्घटना ग्रस्त हो जाए और पुलिस की गिरफ़्त में आ जाए । सभी माँ -बाप अपने बच्चे के शुभ- चिंतक होते हैं तो इस मामले में क्यों अपना फ़र्ज भूल जाते हैं ।
जब कोई सड़क हादसे में दुर्घटना ग्रसित होता है तो कितनी दर्दनाक स्थिति होती है उस घायल की और उसके परिवार की.
इसलिए इस जीवन का मूल्य समझिये खुद भी सुरक्षित चलिए औरों को भी सुरक्षित चलने दीजिए ।
मैंने देखा है लोग ओवर- टेकिंग में बड़ा विश्वास करते हैं । कई के लिए तो ये' ईगो प्रॉब्लम 'हो जाती है । मुझे उससे आगे ही निकलना है किसी भी कीमत पर ,या फिर वो मुझसे आगे कैसे निकल गया। अब देख मैं बताता हूँ तुझे.!। ये मानसिकता ही दुर्घटना का कारण बनती है । ज़रा सी ईगो को सँभालने के लिए वह कभी -कभी अपनी ज़िंदगी भी दाव पर लगा देते हैं । अब जरा सोचिए !आप शहीद भी हुए तो किस लिए कोरी ईगो के लिए । जिसमे सम्मान जनक कुछ न पहले था, न बाद में । न पहले कुछ हासिल होने वाला था न बाद में हुआ ।
आगे निकलने की इतनी ज़ल्दी आख़िर किसलिए कि जिंदगी ही पीछे रह जाए ।
तो सड़क पर वाहन चलाते वक़्त आगे निकलने की जल्दी न करें । रॉन्ग साइड से गाड़ी निकालने की कोशिश बिल्कुल न करें। १० ,१५, मिनिट लेट होना ज़िंदगी भर 'लेट' होने से बेहतर है । इसलिए धीरे चलें और सुरक्षित चलें ।
'सड़क- सुरक्षा सप्ताह हेतु जनहित में जारी '

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