लिव- इन- रिलेशनशिप एक बीमारी




हाल ही में  लिव- इन- रिलेशनशिप कानून की विसंगतियों पर कुछ सवाल उठे  हैं ।मुझे तो अफ़सोस है कि इस तरह के विषय को कानूनी मान्यता मिली ही क्यों ?
  मेरी दृष्टि में तो ये विषय पूरी तरह नैतिकता और भारतीय संस्कृति की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है । इस विषय  को कानून से नहीं बल्कि संस्कारों और मानवीय मूल्यों से प्रतिबंधित किये जाने की ज़रुरत थी । भारतीय संस्कृति में जहाँ' विवाह ' को एक पवित्र संस्कार माना गया है । वहाँ इस तरह के अमर्यादित और संस्कार रहित व्यवहार को कानूनी संरक्षण प्रदान करना'' विवाह' संस्कार की प्रासंगिकता को खत्म कर देता है । जब आप बिना विवाह के साथ रहने की अनुमति दे रहे हो तो यहाँ' विवाह 'का औचित्य ही क्या है । फिर विवाह के नाम पर अनावश्यक खर्चे और दिखावा करने की क्या ज़रूरत है । संतान तो बिना विवाह के भी पैदा हो सकती है और जब इन संबंधों को ही मान्यता मिल  गई है तो संतान भी कहाँ अवैध कहलायी जाएगी । लेकिन क्या ये ईश्वर की नज़रों में या नैतिक मापदंडों पर सही कदम है । मेरी नज़रों में तो बिलकुल नहीं । अब इस तरह के संबंधों से उत्पन्न संतान व इस तरह के संबंधों से प्रभावित महिला या  पुरुष  के अधिकारों के संरक्षण की बात करने का मतलब ही नहीं रह जाता है.इस तरह की मानसिकता का समर्थन करने का मतलब है कि  हम नैतिकता को  ताक में रख कर बस इंसान को वो स्वतंत्रता देना चाह रहे हैं जिससे वो बस ख़ुश रह सके चाहे उसके लिए संस्कृति,सभ्यता और नैतिक मूल्यों की आहुति ही क्यों न दे दी जाए । हम ऐसा  करके हर व्यक्ति को आत्म -नियंत्रणहीन ,चरित्र हीन और उद्दंड बना रहे हैं । इस तरह के संबंधों में न तो वो पवित्र अग्नि -कुण्ड के समक्ष ली गई पवित्र कसमे होती हैं ,न पवित्र यज्ञ -मन्त्र और न ही अपने स्वजनों का आशीर्वाद इसलिए  इन संबंधों में गंदगी के अलावा कुछ नहीं होता है । मेरा मानना है कि इस तरह के संबंधों पर पूर्ण रोक लगाई जाए।आख़िर हमारी भारतीय संस्कृति अपने संस्कार,महान मूल्यों आदि से ही  तो जानी जाती है ।आधुनिक होने का मतलब आत्म -नियंत्रण हीन और मर्यादा हीन होना नहीं हो सकता । जो कपल बिना शादी के साथ रह सकते हैं तो उन्हें शादी करने में ही क्या समस्या है । जहाँ तक बात मतभेदों की या अलग होने की है वो किसी भी समय पैदा हो सकते हैं । शादी में सम्मान और अधिकार तो सुरक्षित रहते हैं।फिर लिव-इन-रिलेशनशिप को अपना कर क्यों अपना सम्मान और अधिकार खोना..  ?संस्कारित तरीके से और शादी करके ही क्यों न अपनी नई ज़िन्दगी की शुरुआत की जाए । मन  की अस्थिरता और भटकाव को क्यों इस तरह की रिलेशनशिप के माध्यम से सपोर्ट किया जाए । 

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