1  मेरी दुश्मनी उसके ख़यालातों से थी, जब से बदले हैं उसने मेरा मित्र हो गया है ।



२ ये एक नज़रिया ही तो है कि एक व्यक्ति के लिए कोई तो जान देने को तैयार रहता है और कोई उसी व्यक्ति की जान लेने को आतुर रहता है ।

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