'वो नेक दिल इंसान '



अपनी अम्मा के पीछे -पीछे भागते हुए वो बहुत दूर निकल गई थी । दूर तक उसे अपनी अम्मा नज़र नहीं आ रही थी।
9 साल की यह नन्ही बालिका गाँव से बाहर दूर किसी जंगल में पहुँच गई थी। उसने देखा चारों तरफ घने-घने पेड़ थे । उसे उस जंगल से बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल पा रहा था और तभी अचानक जोरों की बारिश और शुरू हो गई । बारिश के साथ मोटे -मोटे ओले और गिरने लगे थे । ये एक तेज तूफ़ान था और वो नन्ही सी बालिका इस तूफ़ान में अकेली ,डरी, सहमी सी थी । ओलो की मार खाते खाते और निकलने का कोई रास्ता न मिल पाने के कारण ये बालिका जोर-जोर से रोने लगी । 

कुछ दूरी  पर घने पेड़ों के पीछे शायद कोई एक कच्चा सा घर था जो स्पष्ट दिखाई नहीं दे पा रहा था। उस घर से कोई व्यक्ति उस बालिका की रोने की आवाज़ सुन कर बाहर आया।उसने बालिका से उसके रोने का कारण पूछा और फिर उसके परिजनों की जानकारी ली । सौभाग्य से वह व्यक्ति उस बालिका  के परिजनों का परिचित निकला । उसने बालिका को बड़े ही स्नेह से कुछ-खिलाया-पिलाया और उसे बड़ी ही आत्मीयता से विश्वास भी दिलाया कि वह उसे उसके घर पहुँचा देगा । बालिका को उस व्यक्ति पर विश्वास हुआ और वह प्रफुल्लित हो उठी । उसके चेहरे पर एक  मीठी सी मुस्कान आई और उस व्यक्ति ने भी हर्ष से बालिका को गोद में उठा लिया।फटे -पुराने से कपड़ों में यह व्यक्ति ठण्ड से काँप रहा था फिर भी इसके  हाथ में जो कम्बल था उसने बालिका केे सर पर ओढ़ाया और बालिका केे  घर की ओर निकल पड़ा । रास्ते में ही बालिका की अम्म्मा  मिल गई  थीं । अम्मा ने बालिका को  देखा और ख़ुशी से रोने लगी.अम्मा ने व पूरे परिवार ने उस आदमी का शुक्रिया अदा किया, उसे बहुत-बहुत दुआएँ दी .

वास्तव में वो बहुत ही निश्छल और नेक दिल इंसान था । गरीब होते हुए भी वह इंसान नेकी की बेशुमार पूँजी से समृद्ध था।अम्मा ने उनकी आर्थिक मदद की और उनकी हर संभव  सहायता का  वादा भी किया ।
 
आज भी जब उस घटना की याद आती है तो मन उस व्यक्ति के सामने नतमस्तक हो जाता है क्योंकि मैं ही वो बालिका हूँ जो अम्मा के पीछे-पीछे उस दिन जंगलों की ओर निकल पड़ी थी ।





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