नवरात्रि संकल्प
साल में दो प्रमुख नवरात्रे आते हैं । इन नवरात्रों में हमें ये संकल्प लेना चाहिए कि हमारा हर कर्म माँ दुर्गा की भक्ति में लीन रहते हुए उच्च और पवित्र हो । माँ दुर्गा की भक्ति हम अपनी असीमित कामनाओं की पूर्ति या स्वार्थ सिद्धि के लिए नहीं करें वरन मन मस्तिष्क को पवित्र रखते हुए ऐसे कर्म करने के लिए करें जिनसे दूसरों का भी भला हो और स्वं को मानसिक शांति का अनुभव हो । वैसे तो माँ की भक्ति ही अपने -आप में एक बहुत बड़े आनंद का अनुभव है । माँ की पूजा के इन दिनों में हमे अपने अंदर इतनी सात्विक शक्तियाँ पैदा कर लेनी चाहिए कि सम्पूर्ण वर्ष उनका संग्रह खत्म न हो । कन्या से लेकर बुजुर्ग महिला तक हर अवस्था की स्त्री के प्रति हमारा मन निर्मल और श्रद्धा से पूर्ण हो । हम सभी को पवित्र दृष्टि से देखें ।
यही पवित्रता हर स्त्री के विचारों में भी होनी चाहिए । माँ की भक्ति का ये पर्व तभी सम्पूर्ण और सार्थक होगा जब हर व्यक्ति पवित्र मन और स्व -भाव से ऊपर उठ कर इसे मनाए ।कई कलुषित मन के लोग नवरात्रे जैसे पावन पर्व में भी छोटी-छोटी अबोध कन्याओं के साथ दुराचार कर डालते हैं । ऐसे पशु -वृत्ति वाले लोगों को ये ध्यान रखना चाहिए कि हर अबोध कन्या देवी माँ का रूप होती है और ऐसी मानसिकता रखने वाले का बध माँ किस प्रकार करती हैं ये सर्व -विदित है । सद्गुणों से युक्त, देवी माँ में आस्था रखने वाली हर महिला शक्ति का रूप होती है । अत:ऐसी स्त्री के प्रति ग़लत भाव रखना देवी माँ की सत्ता को चुनौती देना है इसलिए हर स्त्री का सम्मान करें ।
स्त्री के सम्मान की रक्षा करने वाला और उसके प्रति सम्मान के भाव रखने वाला पुरुष माँ दुर्गा का प्रिय होता है । नारी का हर रूप में सम्मान करें चाहे वो पत्नी ,बहन, माँ ,भाभी आदि किसी भी रिश्ते में हो । उसकी गरिमा को कभी चोट न पहुंचे । माँ दुर्गा बड़े ही सौम्य रूप वाली व ममतामयी हैं। उन्हें रौद्र रूप में न आने दें अन्यथा उनके कोप से पूरी सृष्टि में हलचल मच जायेगी ।

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