मिज़ाज अपने -अपने
आपने अपने आस-पास या कही बाहर भी ये महसूस किया होगा कि कुछ लोग बोलने के बहुत ज़्यादा आदी होते
हैं तो कुछ लोग बिल्कुल कम बोलना पसंद करते हैं । जो ज़्यादा बोलने के आदी होते हैं उनका ऐसा हाल रहता है कि रास्ते से अच्छा -खासा गुजर रहा बंदा कब उनकी चपेट में आ जाए भगवान ही जाने । कभी -कभी तो ये लोग दरवाज़े के बाहर ऐसे घात लगाए बैठे रहते हैं जैसे कोई शिकारी अपने शिकार पर लगाता है । बस आपके बाहर निकलने की देरी है बस आपको दबोच लिया जायेगा। फिर तो आधा -एक घंटे से पहले आपको टस से मस नहीं होने दिया जायेगा । आप मज़बूर से खड़े हुए बस हाँ ,हूँ ही कर पायेँगे । अपने आस-पास के लोगों की पूरी ताज़ा -खबरें आपको ये' चिपकू लाइव 'चैनल स्वत: ही दे देगा । सारी रेसीपीज ,सारे खानदान का ब्यौरा आपको ये चैनल 1 घण्टे में उपलब्ध करा देगा ।
ये बात अलग है कि इस ऑटो स्टार्ट चैनल को बंद करने का रिमोट आपके पास नहीं होगा । ये अपनी ही मर्ज़ी से शुरू होगा और बंद भी । अब आप जितनी देर यहाँ बने रह सकते हैं ठीक वरना यहाँ से भागते ही आपकी पीठ पीछे ये पार्टी आपकी महिमा का जो गुणगान करने वाली है बस अल्लाह ही बचाए। ये तो थी ज़्यादा बोलने वालों की दास्तां ।
ये बात अलग है कि इस ऑटो स्टार्ट चैनल को बंद करने का रिमोट आपके पास नहीं होगा । ये अपनी ही मर्ज़ी से शुरू होगा और बंद भी । अब आप जितनी देर यहाँ बने रह सकते हैं ठीक वरना यहाँ से भागते ही आपकी पीठ पीछे ये पार्टी आपकी महिमा का जो गुणगान करने वाली है बस अल्लाह ही बचाए। ये तो थी ज़्यादा बोलने वालों की दास्तां ।
अब हम कम बोलने वालों की स्थिति बताते हैं । कम बोलने वालों की स्थिति इनसे विपरीत होती है । ये लोग अधिकतर घर में ही रहना पसंद करते हैं । अपने आप में ही संतुष्ट रहते हैं । इनके आस-पास से कोई परिचित गुजरे तो नज़र बचाकर या अपनी दिशा बदलकर निकलने में विश्वास करते हैं । ये घर से बाहर किन्ही विशेष परिस्थितियों में ही निकलते हैं जैसे भूकंप आ जाना ,खाने -पीने का सामान ख़त्म हो जाना या फिर बाहर कोई डाक वाला या कोई चंदे वाला खड़ा हो । अन्यथा ये अपने बिल में ही खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं । किसी ज़्यादा बोलने वाले का भय इन्हें ऐसे ही होता है जैसे साँप को नेवले से ।

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